पहुँची जब परीक्षा भवन , साक्षात् दर्शन हुए यमदूत के,
देखा यमदूत के हाथों में भारी भरकम बंडल,
हाथों में दर्द , चाल थी उनकी धीमी,
उफ!! ये परीक्षाएँ
टीचर जी कोरोना अंकल से सीखो,
अब है सोशल मीडिया का ज़माना,
व्हाट्सअप ,फेसबुक से सीखे फ्यूचर ब्राइट करने के नुस्खे,
ऑनलाइन परीक्षा लो,सुनहरा भविष्य बनाओ सबका..
यह क्या मास्टर जी,इतिहास का पर्चा, अरे! आज तो गणित की परीक्षा,
है……थी….. चल छोड़
ना,
सौ नंबर का पर्चा देख छा गया अंधकार, खुजाने लगी अपने सिर
को,
गोलमाल है भाई …….सब गोलमाल है……..
देख मुझे प्रश्न पत्र भी मुस्काराए....hey papu what's
up
अरे!!अठारह सौ सत्तावन में किसके बीच युद्ध हुआ, क्या करना
है मुझे इससे,
पूछ लेते…..कौन थी रानी पद्मावती? फौरन लिख देता दीपिका पादुकोण……..
कौन है,कांग्रेस अध्यक्ष........... बूझो तो जाने ,टीचर जी my.mom……who else,
सवाल पर सवाल.... आने दो मुझे सत्ता में ,
बस और सवाल नहीं , 56 इंच के सीने वाले से कर दूँगा शिकायत....
अजब-गजब की है ये परीक्षाएँ,
कहते हैं, भूतकाल को वर्तमान काल में बदलो!!
भूतकाल वाली गुनगुना रही ‘ तू दिया, मैं बाती’.....
वर्तमान में कही बोल दिया मैं हूँ डॉन......
आंखें मूंद कर याद करने लगा संकट मोचन हनुमान को,
3 घंटे की कैद, छींक को भी है ‘नो एंट्री’ जनाब,
माना आ- जा नहीं सकते कही, चलो जुल्फों से ही खेल ले,
बना मेज को तबला गाना ही गुनगुना ले …..हो
उड़े जब जब जुल्फें तेरी
कावरियों का दिल मचले……..
ध्यान भटका जरा-सा टीचर जी का,
खेल लिये गुली डंडा, काफी थी पेंसिल-रबड़ उसके लिए,
नहीं कर सकते बातें पड़ोसन से, पर ऑंख- मिचौली तो खेल सकते उससे……..
रात-भर सोने नहीं दिया फेसबुक नोटीफिटेशन ने,
मौका भी है दस्तूर भी, पूरी कर ले तू अपनी नींद
गीता बोली..... कर्म कर, फल की इच्छा मत रख तू……..
उफ़!
ये परीक्षाएँ किसने बनाई,
दरख्वासत
है आम आदमी पार्टी से, लाए बच्चों के लाए मुफ्त अंक पॉलिसी,
जय
हो झाड़ू बाबा की…….
खुली नींद सामने खड़ी टीचर जी गुनगुना रही थी,
पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा बेटा हमारा ऐसा काम करेगा,
मगर ये तो, कोई ना जाने के तेरी मंज़िल, है कहाँ,
सोच विचार किया, है अच्छी ईमेज है अपनी
थाम कलम हाथों में, चला दे जादू पेपर पर…….. उफ!! ये परीक्षाएँ
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